शनिवार, 21 फ़रवरी 2026

माँ यमुना: आस्था, इतिहास और वर्तमान की वेदना

 

माँ यमुना: आस्था, इतिहास और वर्तमान की वेदना

यमी, कालिंदी और कृष्णप्रिया यमुना

एक पवित्र नदी ... जिसे ग्रंथों में यमी के रूप में जाना जाता है , साहित्य जिसे कालिंदी कहता है। हिंदू शास्त्रों में, वह सूर्य , बादल देवी की बेटी हैं । वह मृत्यु के देवता यम की जुड़वां बहन भी हैं। वह भगवान कृष्ण के साथ उनकी आठ प्रमुख पत्नियों में से एक के रूप में जुड़ी हुई हैं, जिन्हें अष्टभर्या कहा जाता है । जिसके जल में स्नान करने या इसे पीने से पाप दूर होते हैं। जो भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की साक्षी है हाँ मैं बात कर रहा हूँ माँ यमुना नदी की ......

पौराणिक उत्पत्ति और दिव्य परिवार

यमुना नदी को सूर्य की पुत्री हालांकि कुछ कहते हैं कि वह ब्रह्मा की पुत्री थीं और उनकी पत्नी सरन्यू बादलों की देवी और मृत्यु के देवता यम की जुड़वां बहन के रूप में वर्णित किया गया है। उनके अन्य भाइयों में वैवस्वत मनु , पहले मनुष्य, जुड़वां अश्विन , दिव्य चिकित्सक, और शनिदेव शामिल हैं। उन्हें सूर्य की प्रिय संतान के रूप में वर्णित किया गया है। सूर्य की पुत्री के रूप में, उन्हें सूर्यतनया, सूर्यजा और रविनंदिनी भी कहा जाता है।

श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की साक्षी

भगवान श्री कृष्ण की के गोकुल आगमन से लेकर उनकी बाल लीलाओं की साक्षी रही है यमुना मैया

महाभारत और प्राचीन महत्व

महाभारत में यमुना को गंगा की सात सहायक नदियों में से एक बताया गया है। इसके पानी को पीने से पापों से मुक्ति मिलती है। महाभारत में यज्ञों तपस्या और यहां तक कि पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ (आधुनिक दिल्ली )भी यमुना के तट पर स्थित है... का उल्लेख मिलता है।

भाई दूज और यम-यमुना की कथा

भारत में भाई दूज का त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। भाई दूज मनाने के पीछे यम और यमुना से जुड़ी एक पौराणिक कहानी है। इस खास दिन पर बहनें यमराज की पूजा करती हैं, ताकि उनका भाई जीवन में सफल हो और उसकी उम्र लंबी हो। यह भी माना जाता है कि जो भी भाई इस दिन यमुना नदी में स्नान करके अपनी बहन का आतिथ्य स्वीकार करता है और अपनी बहन से तिलक करवाता है, उसे यम का भय नहीं रहता है।

यमुनोत्री से उद्गम

यमुनोत्री नामक जगह से निकलती है। यमुना का उद्गम स्थान हिमालय के हिमाच्छादित श्रंग बंदरपुच्छ ऊँचाई 6200 मीटर से 7 से 8 मील उत्तर-पश्चिम में स्थित कालिंद पर्वत है, जिसके नाम पर यमुना को कालिंदजा अथवा कालिंदी कहा जाता है।

हिमालय से मैदानों तक की यात्रा

अपने उद्गम से आगे कई मील तक विशाल हिमगारों और हिम मंडित कंदराओं में अप्रकट रूप से बहती हुई तथा पहाड़ी ढलानों पर से अत्यन्त तीव्रतापूर्वक उतरती हुई इसकी धारा यमुनोत्तरी पर्वत (20,731 फीट ऊँचाई) से प्रकट होती है। वहाँ इसके दर्शनार्थ हजारों श्रद्धालु यात्री प्रतिवर्ष भारत वर्ष के कोने-कोने से पहुँचते हैं।

यह नदी अनेक पहाड़ी दर्रों और घाटियों में प्रवाहित होती हुई तथा वदियर, कमलाद, वदरी अस्लौर जैसी छोटी और तोंस जैसी बड़ी पहाड़ी नदियों को अपने अंचल में समेटती हुई आगे बढ़ती है। उसके बाद यह हिमालय को छोड़ कर दून की घाटी में प्रवेश करती है। वहाँ से कई मील तक दक्षिण-पश्चिम की और बहती हुई तथा गिरि, सिरमौर और आशा नामक छोटी नदियों को अपनी गोद में लेती हुई यह अपने उद्गम से लगभग 95 मील दूर वर्तमान सहारनपुर जिला के फैजाबाद ग्राम के समीप मैदान में आती है। उस समय इसके तट तक की ऊँचाई समुद्र सतह से लगभग 1276 फीट रह जाती है। फिर यह दिल्ली, आगरा से होती हुई प्रयागराज में गंगा नदी में मिल जाती है।

भौगोलिक विशेषताएँ

यमुना नदी की औसत गहराई 10 फीट (3 मीटर) और अधिकतम गहराई 35 फीट (11 मीटर) तक है। दिल्ली के निकट नदी में, यह अधिकतम गहराई 68 फीट (50 मीटर) है। आगरा में, यह गहराई 3 फुट (1 मीटर) तक हैं।

ब्रज संस्कृति और धार्मिक महत्व

वर्तमान काल में यमुना की एक ही धारा है और उसी के तट पर वृन्दावन बसा हुआ है। वहाँ मध्य काल में अनेक धर्माचार्यों और भक्त कवियों ने निवास कर कृष्ण भक्ति का प्रचार किया वृन्दावन से आगे दक्षिण की ओर बहती हुई यह नदी मथुरा नगर में प्रवेश करती है। मथुरा यमुना के तट पर बसा हुआ एक ऐसा ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान है, जिसकी दीर्घकालीन गौरव गाथा प्रसिद्ध है। यहाँ पर भगवान श्री कृष्ण ने अवतार धारण किया था, जिससे इसके महत्व की वृद्धि हुई है। आगरा विश्व प्रसिद्ध ताजमहल भी यमुना किनारे ही है।

प्रदूषण की गंभीर समस्या

लेकिन यह नदी सबसे ज्यादा प्रदुषित हो चुकी है ...राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यमुना के प्रदूषण के लिए बढ़ते आबादी के बोझ और सीवेज के साथ साथ उद्योगों का बड़ा हाथ है। इनकी सही तरह से निगरानी नहीं की जा रही है।
दिल्ली में जितने भी उद्योग हैं, उनके यहां सेंट्रल इंफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट ठीक से संचालित नहीं हो रहे हैं। जितनी मात्रा में वे गंदगी उत्सर्जित कर रहे हैं, उतनी मात्रा में उसका ट्रीटमेंट नहीं हो रहा है। यही वजह है कि केमिकल की मात्रा का पता नहीं चल पा रहा है और यमुना में झाग ही झाग दिखाई देता है। यमुना एक्शन प्लान बनाने के बाद बढ़ी हुई आबादी का तर्क दिया जाता है। इसके लिए सीवेज व्यवस्था को बढ़ाया गया है। लेकिन, उस मात्रा में ट्रीटमेंट की व्यवस्था नहीं की गई है।

शाहदरा ड्रेन और बीओडी स्तर

यमुना को प्रदूषित करने में सबसे बड़ी भूमिका शाहदरा ड्रेन की है। इसकी गंदगी गिरने के बाद यमुना नदी में बायोलाजिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) की जितनी मात्रा ओखला बैराज पर होती है, उतनी मात्रा न इससे पहले कहीं मिलती है और न ही इसके बाद में।

इस रिपोर्ट से एक जानकारी यह भी मिलती है कि पल्ला में भी दो जगह पानी के नमूने लिए जाते हैं। एक दिल्ली में प्रवेश के दौरान और दूसरा वजीराबाद से पहले। यहां भी बीओडी के स्तर में काफी बदलाव आ जाता है। पहले प्वाइंट पर बीओडी की मात्रा 11.0 मिलीग्राम प्रति लीटर रही और दूसरे प्वाइंट पर 14.0 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गई।

बीओडी क्या है?

जैविक अथवा जैवरासायनिक आक्सीजन मांग (बीओडी) पानी में कार्बनिक पदार्थों के अपघटन के लिए सूक्ष्मजीवों द्वारा उपयोग की जाने वाली घुलनशील आक्सीजन की मात्रा होती है। निम्न बीओडी अच्छी गुणवत्ता वाले पानी का एक संकेतक होता है, जबकि उच्च बीओडी प्रदूषित पानी को दर्शाता है।

जल गुणवत्ता मापन और आँकड़े

8 स्थानों पर मापी जाती है यमुना में पानी की गुणवत्ता
दिल्ली में यमुना के पानी की गुणवत्ता आठ स्थानों पर मापी जाती है। लेकिन, तीन जगह ओखला बैराज, ओखला ब्रिज एवं आइटीओ पर बीओडी की मात्रा सबसे ज्यादा मिलती है। इनमें भी शाहदरा ड्रेन मिलने के बाद ओखला में जहां बीओडी का स्तर 83 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच जाता है। इतना स्तर ओखला बैराज पर यमुना में आगरा कैनाल के मिलने पर भी नहीं पहुंचता है।

जनवरी, 2021 की दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में अनुमानित सीवेज उत्पादन लगभग 3273 मिलियन लीटर प्रति दिन है, जबकि स्थापित सीवेज उपचार क्षमता लगभग 2715 ही है, जिसमें से लगभग 2432 सीवेज का उपचार दिल्ली में किया जा रहा है। इस प्रकार, लगभग 941 सीवेज विभिन्न नालों के माध्यम से नदी में अपना रास्ता खोज रहा है। इसके अलावा, दिल्ली में 17 औद्योगिक समूहों के लिए 13 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट मौजूद हैं और रिपोर्ट के अनुसार, ये सभी गैर-अनुपालन वाले हैं।

निष्कर्ष: अस्तित्व की पुकार

भारतवर्ष की सर्वाधिक पवित्र और प्राचीन नदियों में यमुना की गणना गंगा के साथ की जाती है। ब्रजमंडल की तो यमुना एक मात्र महत्वपूर्ण नदी है। जहाँ तक ब्रज संस्कृति का सम्बंध है, यमुना को केवल नदी कहना ही पर्याप्त नहीं है। वस्तुत: यह ब्रज संस्कृति की सहायक, इसकी दीर्ध कालीन परम्परा की प्रेरक और यहाँ की धार्मिक भावना का प्रमुख आधार रही है। लेकिन मानव के इतने लम्बे इतिहास की साक्षी रही माँ यमुना.... अपने अस्तित्व से लड़ रही है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के दर्शन करने वाली माँ यमुना हम सबकी ओर देख रही है अपने अस्तित्व की लड़ाई को लेकर .........

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें