शब्दों में समाज, भावनाओं में जीवन। सामाजिक कहानियाँ, नाटक, कविताएँ और उपन्यासों का एक साहित्यिक मंच....
चिट्ठी वाला डाकिया
वह बूढ़ा डाकियाअब भी उसी पगडंडी पर चलता है,बस उसके थैले मेंचिट्ठियाँ कमऔर स्मृतियाँ अधिक हैं।