चिट्ठी वाला डाकिया
वह बूढ़ा डाकिया
अब भी उसी पगडंडी पर चलता है,
बस उसके थैले में
चिट्ठियाँ कम
और स्मृतियाँ अधिक हैं।
चिट्ठी वाला डाकिया
वह बूढ़ा डाकिया
अब भी उसी पगडंडी पर चलता है,
बस उसके थैले में
चिट्ठियाँ कम
और स्मृतियाँ अधिक हैं।
बरगद की छाँव में
एक चौपाल हुआ करती थी...
कुछ चारपाइयाँ,
एक पुराना हुक्का,
और शाम होते ही
पूरा गाँव वहाँ बैठ जाया करता था।
कागज़ की नाव...
आज बरसों बाद...
बारिश हुई।
मैं खिड़की के पास जाकर खड़ा हो गया।
सामने सड़क पर
पानी बह रहा था।
एक छोटा-सा बच्चा
अपने दोनों हाथों से
कागज़ की नाव बनाकर
उसे पानी में छोड़ रहा था।
वह उसके पीछे-पीछे दौड़ रहा था...
और मैं...
अपनी जगह खड़ा रह गया।