कभी किसी खामोश रात में दूर कहीं से एक स्वर आया— “आएगा आने वाला…” और सचमुच आया… एक ऐसा स्वर, जिसने सुरों को आवाज़ दी, आवाज़ को पहचान दी, और पहचान को भारत की आत्मा बना दिया। फिर जिंदगी ने पूछा— ये कैसा सफर है? हम मुस्कुराकर कह उठे— “अजीब दास्तां है ये…” क्योंकि कुछ आवाज़ें सुनी नहीं जातीं, वे सीधे दिल में उतरती हैं। कभी प्रेम ने सिर झुकाया, कभी विरह ने आँखें भिगोईं, कभी किसी ने चुपके से कहा— बस कुछ पल और… तो आपकी आवाज़ ने समय को थाम लिया— “लग जा गले…” और उन दो शब्दों में न जाने कितने बिछड़ते रिश्ते अपना घर पा गए। प्रेम जब दुनिया से डरने लगा, तो आपके स्वर ने मधुबाला के अधरों से इतिहास को चुनौती दी— “प्यार किया तो डरना क्या…” और प्रेम सिर्फ कहानी नहीं रहा, एक साहस बन गया। फिर किसी ने पूछा— क्या साथ केवल पास रहने का नाम है? आपकी आवाज़ आई— “तू जहाँ जहाँ चलेगा, मेरा साया साथ होगा…” और लगा… कुछ लोग शरीर से दूर होकर भी हमारी जिंदगी से कभी दूर नहीं होते। कुछ रिश्ते दिखाई नहीं देते, फिर भी हर कदम पर साथ चलते हैं। कभी बारिश आई… खिड़की पर बूंदें उतरीं, हवा में मिट्टी की खुशबू घुली और मन...