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पुराना छाता

  अध्याय- 1 जिस घर की पहचान एक बरामदा था गाँवों में घरों के नाम नहीं होते। उनकी पहचान होती है। किसी घर के सामने पीपल का पेड़ होता है, किसी के आँगन में पुराना कुआँ, किसी के दरवाज़े पर लाल रंग का किवाड़। लोग पता नहीं बताते, केवल एक निशानी बताते हैं और राहगीर बिना भटके वहाँ पहुँच जाता है। उस गाँव में भी एक घर था। यदि कोई बाहर का आदमी पूछ बैठता—रघुनाथ प्रसाद का घर किधर है? तो गाँव का सबसे छोटा बच्चा भी मुस्कुराकर कह देता—अरे... वही बड़ा-सा बरामदा वाला घर? सीधे चले जाइए...जहाँ तुलसी का चौरा दिखे, वहीं।