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हार मानना और हार जाना

 



हार जाना
इतना बड़ा दुःख नहीं,
जितना दुःख है
हार मान लेना।

गिर जाना कोई अंत नहीं,
कभी-कभी तो गिरना भी
रास्ते का हिस्सा होता है।

थक जाना स्वाभाविक है,
कुछ पल रुक जाना भी—
मगर अपने सपनों से
मुँह मोड़ लेना
सिर्फ़ इसलिए कि राह कठिन है,
यह हार नहीं...
अपने भीतर की आवाज़ को चुप कर देना है।

चिड़िया पहली उड़ान में
आसमान नहीं नापती,
नदी पहली लहर में
समुद्र नहीं बनती।

हर शुरुआत
काँपते कदमों से होती है।

तो आज अगर थक गए हो,
थोड़ा ठहर जाओ...
मगर लौटना मत।

आज अगर रोना है,
रो लो...
मगर अपने आँसुओं को
अपनी आख़िरी कहानी मत बनने देना।

क्योंकि—

हार जाना परिस्थिति है,
हार मान लेना निर्णय।

और जब तक निर्णय
तुम्हारे हाथ में है,
तब तक कहानी खत्म नहीं हुई।

इसलिए उठो...

कल की जीत के लिए नहीं,
बस आज फिर कोशिश करने के लिए।

क्योंकि कई बार
जीतने वाला सबसे मजबूत नहीं होता,
वह बस इतना करता है—
जब बाकी सब लौट जाते हैं,
वह एक कदम और चलता है।

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